Tuesday, October 23, 2018

अनमोल निधि


काजल सी काली आंखों में
चंचल मन के भाव लिए

फूलों से कोमल होंठों पर
झरने से सुंदर गीत सजे

नन्हें नन्हें पांवों से वो
जब इठलाकर चलती है

मेरे मन में ममता के
भावों की सरगम बजती है

नन्ही नाजुक कोमल सी
मेरे अंगना की परी है वो

सारे जग से बड़ी ही प्यारी
मेरी अनमोल निधि है वो
***अनुराधा चौहान***

Monday, October 22, 2018

मिट्टी के घड़े सी जिंदगी


करले पूरे कुछ काम अधुरे
यह सुबह कब बीत जानी है

मिट्टी के घड़े सी जिंदगी
पता नहीं कब फूट जानी है

हाड़-मांस का सुंदर संसार
कब मिट्टी में मिल जाए

पंछी बन जीवन की ज्योति
आसमान में उड़ जाए

पाप-पुण्य के खेल में
मत जीवन को घेर

मानवता सबसे बड़ा धर्म है
नहीं रखो किसी से बैर

क्यों तेरा-मेरा करने में
अपने जीवन को यूं खोते हो

जब समय हाथ से जाता है
फिर हाथ मलते क्यों रोते हो

करो बड़ो का आदर
छोटों से करो प्यार

चार दिन की जिन्दगी है
क्यों करते वक्त बर्बाद।
***अनुराधा चौहान***

Thursday, October 18, 2018

कुचलती आशाएं



बातें मर्यादा की बड़ी बड़ी
नियत में उनके खोट भरी
राम नहीं किसी को बनना
पर सीता की चाह है रखना
आंखों में जिनके मैल भरा
वो कहां देखते पावन चेहरा
मासूम सुमनों के खिलते ही
तोड़ने आ जाती यह दुनिया
नहीं सुरक्षित नारी जीवन
कलयुग के इन हैवानों से
कितने ही युग बीत गए
बीत गईं कितनी सदियां
नारीे जीवन का अभिशाप बनी
हर युग में रावण की दुनिया
कुचलती आशाएं बेरहम दुनिया
बांध के बंधन पैरों में
करने असुरों का फिर विनाश
आ जाओ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
फिर से तुम उद्धार करो
काट के बेड़ियां पैरों से
***अनुराधा चौहान***

Sunday, October 14, 2018

किस्मत


किस्मत पर किसी का बस न चले
किस्मत के आगे बेबस खड़े
क्यों रोते किस्मत का रोना
किस्मत का लिखा प्रभू को भी पड़ा सहना
राम ने खोया राजतिलक
वन-वन भटके चौदह वर्ष
जनकदुलारी सीता सुकुमारी
किस्मत में लिखी जुदाई अतिभारी
राधा कृष्ण का प्रेम अमर
किस्मत में होना था उनको अलग
सती से जुदाई की पीड़ा
महादेव को भी पड़ी सहना
किस्मत किसे कहां ले जाए
यह कोई कभी समझ न पाए
कौन रंक से राजा बने
कौन राजा से रंक बन जाए
किस्मत पर किसी का बस न चले
किस्मत के आगे बेबस खड़े
***अनुराधा चौहान***


चित्र गूगल से साभार

Saturday, October 13, 2018

तुझ से ही तुझ को चुरा लूं


हर लम्हे में तुझको बसा लूं

आ पलकों में अपनी छुपा लूं

गुम न हो जाए कहीं वजूद तेरा

तुझ से ही तुझ को चुरा लूं

उम्र का सफर अब गुजरने लगा

तेरे एहसास को सांसों में बसा लूं

मोहब्बत मोहताज नहीं उमर की

चल संग तेरे हसीन लम्हें बिता लूं
***अनुराधा चौहान***

Thursday, October 11, 2018

किस पर करें भरोसा

किससे करें शिकायत किस पर करें भरोसा

हमदर्द ही अपना जब दे जाए अगर धोखा

मासूम से चेहरे पर चढ़ा मतलब का मुखोटा

सच्चों को झूठों में भी सब सच ही है दिखता

चेहरे के ऊपर मुखोटा मुखोटे में विषधर

कौन है हमारा हमदर्द कौन जाएगा हमें डस
               ***अनुराधा चौहान***

Monday, October 8, 2018

जय हनुमान

भावों के मोती
🌸🌹🌸
केसरी नंदन राम दुलारे
भक्तों के तुम रखवाले
हे वीर प्रतापी शोर्यवान
दुष्ट सदा तुमसे भय खाते
पवनपुत्र वीर बजरंगी
राम-लखन के तुम हो संगी
राम मुद्रिका सीता को दे आए
श्री राम का संदेश सुनाए
विकट रूप जब तुमने रखा
क्षण में रावण की लंका दी जला
संजीवनी को समझ नहीं पाए
पूरा पर्वत संग ले आए
गदा तुम्हारे हाथ में सोहे
राम सिया सदा मन मोहे
दिल में छवि उनकी बसाए
तुम भक्त प्रिय राम सिया के
अंजनी मां के पुत्र तुम प्यारे
भूत पिसाच नाम से भागे
भानू को देख सदा मुस्कुराते
लीला था उन्हें मधुर फल जान के
चरणों में तेरे शीश झुकाते
प्रभू सबके तुम कष्ट मिटाते
श्रीराम की जो करते पूजा
उनके शीश पर हाथ है तेरा
पवनपुत्र श्री हनुमान
करते हम तुमको प्रणाम
***अनुराधा चौहान***