मन के भाव लिखती हूँ,कविता लिखती हूँ,कहानी लिखती हूँ,यह भाव है मेरे मन के,अपनी मन की जुबानी लिखती हूँ। अनुराधा चौहान
Tuesday, October 23, 2018
Monday, October 22, 2018
मिट्टी के घड़े सी जिंदगी
करले पूरे कुछ काम अधुरे
यह सुबह कब बीत जानी है
मिट्टी के घड़े सी जिंदगी
पता नहीं कब फूट जानी है
हाड़-मांस का सुंदर संसार
कब मिट्टी में मिल जाए
पंछी बन जीवन की ज्योति
आसमान में उड़ जाए
पाप-पुण्य के खेल में
मत जीवन को घेर
मानवता सबसे बड़ा धर्म है
नहीं रखो किसी से बैर
क्यों तेरा-मेरा करने में
अपने जीवन को यूं खोते हो
जब समय हाथ से जाता है
फिर हाथ मलते क्यों रोते हो
करो बड़ो का आदर
छोटों से करो प्यार
चार दिन की जिन्दगी है
क्यों करते वक्त बर्बाद।
***अनुराधा चौहान***
Thursday, October 18, 2018
कुचलती आशाएं
बातें मर्यादा की बड़ी बड़ी
नियत में उनके खोट भरी
राम नहीं किसी को बनना
पर सीता की चाह है रखना
आंखों में जिनके मैल भरा
वो कहां देखते पावन चेहरा
मासूम सुमनों के खिलते ही
तोड़ने आ जाती यह दुनिया
नहीं सुरक्षित नारी जीवन
कलयुग के इन हैवानों से
कितने ही युग बीत गए
बीत गईं कितनी सदियां
नारीे जीवन का अभिशाप बनी
हर युग में रावण की दुनिया
कुचलती आशाएं बेरहम दुनिया
बांध के बंधन पैरों में
करने असुरों का फिर विनाश
आ जाओ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
फिर से तुम उद्धार करो
काट के बेड़ियां पैरों से
***अनुराधा चौहान***
Sunday, October 14, 2018
किस्मत
किस्मत पर किसी का बस न चले
किस्मत के आगे बेबस खड़े
क्यों रोते किस्मत का रोना
किस्मत का लिखा प्रभू को भी पड़ा सहना
राम ने खोया राजतिलक
वन-वन भटके चौदह वर्ष
जनकदुलारी सीता सुकुमारी
किस्मत में लिखी जुदाई अतिभारी
राधा कृष्ण का प्रेम अमर
किस्मत में होना था उनको अलग
सती से जुदाई की पीड़ा
महादेव को भी पड़ी सहना
किस्मत किसे कहां ले जाए
यह कोई कभी समझ न पाए
कौन रंक से राजा बने
कौन राजा से रंक बन जाए
किस्मत पर किसी का बस न चले
किस्मत के आगे बेबस खड़े
***अनुराधा चौहान***
चित्र गूगल से साभार
Saturday, October 13, 2018
Thursday, October 11, 2018
Monday, October 8, 2018
जय हनुमान
भावों के मोती
🌸🌹🌸
केसरी नंदन राम दुलारे
भक्तों के तुम रखवाले
हे वीर प्रतापी शोर्यवान
दुष्ट सदा तुमसे भय खाते
पवनपुत्र वीर बजरंगी
राम-लखन के तुम हो संगी
राम मुद्रिका सीता को दे आए
श्री राम का संदेश सुनाए
विकट रूप जब तुमने रखा
क्षण में रावण की लंका दी जला
संजीवनी को समझ नहीं पाए
पूरा पर्वत संग ले आए
गदा तुम्हारे हाथ में सोहे
राम सिया सदा मन मोहे
दिल में छवि उनकी बसाए
तुम भक्त प्रिय राम सिया के
अंजनी मां के पुत्र तुम प्यारे
भूत पिसाच नाम से भागे
भानू को देख सदा मुस्कुराते
लीला था उन्हें मधुर फल जान के
चरणों में तेरे शीश झुकाते
प्रभू सबके तुम कष्ट मिटाते
श्रीराम की जो करते पूजा
उनके शीश पर हाथ है तेरा
पवनपुत्र श्री हनुमान
करते हम तुमको प्रणाम
***अनुराधा चौहान***
🌸🌹🌸
केसरी नंदन राम दुलारे
भक्तों के तुम रखवाले
हे वीर प्रतापी शोर्यवान
दुष्ट सदा तुमसे भय खाते
पवनपुत्र वीर बजरंगी
राम-लखन के तुम हो संगी
राम मुद्रिका सीता को दे आए
श्री राम का संदेश सुनाए
विकट रूप जब तुमने रखा
क्षण में रावण की लंका दी जला
संजीवनी को समझ नहीं पाए
पूरा पर्वत संग ले आए
गदा तुम्हारे हाथ में सोहे
राम सिया सदा मन मोहे
दिल में छवि उनकी बसाए
तुम भक्त प्रिय राम सिया के
अंजनी मां के पुत्र तुम प्यारे
भूत पिसाच नाम से भागे
भानू को देख सदा मुस्कुराते
लीला था उन्हें मधुर फल जान के
चरणों में तेरे शीश झुकाते
प्रभू सबके तुम कष्ट मिटाते
श्रीराम की जो करते पूजा
उनके शीश पर हाथ है तेरा
पवनपुत्र श्री हनुमान
करते हम तुमको प्रणाम
***अनुराधा चौहान***
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