Saturday, November 10, 2018

पर आवाज़ नहीं होती


आवाज़ ही पहचान है
हर भाव की हर घाव की
आवाज़ से पहचान है
हर किसी जज़्बात की
सुनाई दे जाती है हर आवाज़
जब कुछ टूट कर बिखरे
नहीं सुनाई देती है तो
जब दिल टूट कर बिखरे
तब दिल की आवाज़
दिल ही सुनता है
अपने घावों पर
खुद मरहम रखता है
कुछ अनकहे से दर्द
जब दे जातें हैं अपने
रोता है दिल जार जार
पर आवाज़ नहीं होती
बिखर जाते हैं मन के जज़्बात
पर आवाज़ नहीं होती
मृगमरीचका से रिश्तों के
पीछे हम जीवनभर भागते हैं
वोही छलावा निकल
दिल तोड़ जातें हैं
टूटा हो दिल भले मगर
पर आवाज़ नहीं होती
इशारों में होती है अलगाव की बातें
पर आवाज़ नहीं होती
***अनुराधा चौहान***

22 comments:

  1. बहुत ही सुंदर रचना.. जी

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  2. बहुत खूब ,दर्द की आवाज नहीं होती ,
    कुछ आवाजे ऐसी होती हैं ,जो सुनाई तो देती हैं पर आवाज नहीं होती

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    1. बहुत बहुत आभार रितु जी

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  3. बहुत सुन्दर अनुराधा जी

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    1. धन्यवाद आदरणीया उर्मिला दी

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  4. वाह!!सखी ,बहुत खूब !

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  5. बेहतरीन रचना आवाज ही पहचान है

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    1. बहुत बहुत आभार इंदिरा जी

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    2. वाह बहुत खूब।
      शीशा कहां है दिल मानिंद,
      टूट कर शीशा
      बिखने से पहले आवाज करता है
      दिल बेचारा बिन सबब टूट के बिखर जाथा है।
      अप्रतिम।

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    3. बहुत बहुत आभार सखी

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  6. .....नहीं सुनाई देती है तो
    जब दिल टूट कर बिखरे
    तब दिल की आवाज़
    दिल ही सुनता है
    अपने घावों पर.....
    बहुत ही गज़ब का लिखा आपने---बहुत ही गहन अनुभूति की सशक्त अभिव्यक्ति है इस रचना में---इस सफल रचना के लिए बधाई----अनकही बैटन का कहना और सुनना हर किसी के बस में भी कहाँ---- रेक्टर कथूरिया

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  7. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक ३ दिसंबर २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. बहुत बहुत आभार श्वेता जी

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  8. बहुत सुन्दर...

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  9. हर भाव की हर घाव की
    आवाज़ से पहचान है
    जी बहुत सुंदर भाव..

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