Thursday, November 22, 2018

संघर्ष कठिन है करने

बनता नहीं घरौंदा
पानी के बुलबुलों पर
ख्वाबों को करने पूरा
संघर्ष कठिन है करने

नाकामियों से डर कर
संघर्ष से जो हार मानें
जीवन सफल न होगा
किस्मत भरोसे रह कर

मायूस होकर यूं ही
कभी जिंदगी कटे न
जीने मिला है जीवन
जीवन सफल किए जा

कब तक यह जिंदगी है
इसका न कोई भरोसा
कामयाबी कदम चूमे
संघर्ष तुम ऐसा करलो

कितना कठिन संघर्ष है
देश के वीर जवानों का
सुरक्षा हमारी करने 
तूफानों से हरदम लड़ते

उनसे सबक लेकर
भिड़ जाओ हर मुश्किल से
मुमकिन नहीं सभी को
महलों का सुख मिलें ही
***अनुराधा चौहान***

Wednesday, November 21, 2018

क्रौध की तपन


क्रौध की तपन से
न जलाओ तन और मन
जीवन सफल बनाओं
करके कुछ अच्छे कर्म
शीतल रखो वाणी
शीतल रखो मन
भरलो अपने जीवन में
तुम प्रेम के रंग
कौध की तपन से
जलते जीवन के रंग
दूर होते हैं रिश्ते
नीरस होता है मन
काटने को दौड़ता
केवल अकेलापन
क्रौध की तपन से
यूं न नष्ट करो जिंदगी
अच्छे कर्म के बदले
मिलती है यह जिंदगी
क्यों इस तपन में
खोते हो वजूद अपना
रह जाओगे अकेले
खुशियां बन जाएंगी सपना
करो प्रीत की बारिश
तपन मिटा दो मन की
गले लगा लो सबको
यही पूंजी है जीवन की
***अनुराधा चौहान***

Monday, November 19, 2018

स्मृतियां हमारी साथी

कुछ खट्टी
कुछ मीठी
स्मृतियां होती हैं
तन्हाइयों की साथी
कुछ स्मृतियां
मन को बहलातीं है
तो कुछ मन में
टीस जगाती हैं
अच्छी हों या बुरी हों
यह हमेशा
साथ निभाती हैं
कुछ स्मृतियां
बालपन की
मन को सुकून
दे जाती हैं
जो जिए थे
पल बचपन में
वह खुशियां
दे जाती हैं
कुछ स्मृतियां
मां के घर की
मन में हलचल
मचाती हैं
जिए थे पल जो
उस आंगन में
फिर से जीने की
चाह जगाती हैं
कुछ स्मृतियां
सखियों की
जो अब सब
बिछड़ गई
शादी करके सब
अपने अपने
नए जीवन में
जाकर रम गई
स्मृतियां हमारी
तन्हाइयों की साथी
अक्सर मन को
बहलाती है
कुछ खुशियां देती हैं
तो कुछ गम दे जाती हैं
***अनुराधा चौहान***

Friday, November 16, 2018

संयम

संयम टूटने लगता है
जब लोग झूठ को
लग जाते हैं सच
साबित करने में
संयम तब भी टूटने लगता है
जब आप ग़लत न हो
फिर भी ग़लत
ठहराए जाने लगते हो
संयम तब और टूट जाता है
जब आप किसी पर
अपने से ज्यादा
यकीन करते हो
वो यकीं तोड़ जाए
संयम तब भी खोने लगता है
जब अपनों से
मिलता धोखा है
तब टूटता है दिल
बहुत मायूस होता है
संयम बिखरने लगता है
जब कोई अनायास
आपको अकेले छोड़
किसी और का हो जाता है
संयम रखना पड़ता है
जब दिल व्यथित हो
अपनों की खुशियों के लिए
जबरन मुस्कुराना पड़े
***अनुराधा चौहान***

Tuesday, November 13, 2018

मिथ्या यह जीवन

मिथ्या यह जीवन
मिथ्या इसकी माया
जिसको अब तक
कोई समझ नहीं पाया
मिथ्या है यह काया
जो सबके मन भाया
मौत के सच को
कोई समझ नहीं पाया
व्यर्थ के झगड़ों में
क्यों जीवन को खोते
निकल गया समय तो
फिर रह जाओगे रोते
समय रहते करलो
कुछ कर्म तुम ऐसे
मिट जाए भले यह तन
फिर भी रहो जीते
जीवन की याद रखो
इस कड़वी सच्चाई को
बनी है यह काया 
पल में मिट जाने को
क्यों तेरे मेरे में
समय को हम खोते हैं
जब मिटने आता यह तन
फिर हम रोतें हैं
मिथ्या यह जीवन
स्वीकार करलो यह सच्चाई
करो अपने साथ
तुम औरों की भी भलाई
***अनुराधा चौहान***

Saturday, November 10, 2018

पर आवाज़ नहीं होती


आवाज़ ही पहचान है
हर भाव की हर घाव की
आवाज़ से पहचान है
हर किसी जज़्बात की
सुनाई दे जाती है हर आवाज़
जब कुछ टूट कर बिखरे
नहीं सुनाई देती है तो
जब दिल टूट कर बिखरे
तब दिल की आवाज़
दिल ही सुनता है
अपने घावों पर
खुद मरहम रखता है
कुछ अनकहे से दर्द
जब दे जातें हैं अपने
रोता है दिल जार जार
पर आवाज़ नहीं होती
बिखर जाते हैं मन के जज़्बात
पर आवाज़ नहीं होती
मृगमरीचका से रिश्तों के
पीछे हम जीवनभर भागते हैं
वोही छलावा निकल
दिल तोड़ जातें हैं
टूटा हो दिल भले मगर
पर आवाज़ नहीं होती
इशारों में होती है अलगाव की बातें
पर आवाज़ नहीं होती
***अनुराधा चौहान***

Thursday, November 8, 2018

गोवर्धनधारी तेरी महिमा बड़ी निराली

हे मुरलीधर हे गिरधारी
तेरी महिमा बड़ी निराली
गोकुल में लीला रचाई
रोक अहंकारी इंद्र की पूजा 
गोवर्धन की पूजा करवाई
देख कुपित हुए इंद्र अतिभारी
बरसा की फिर झड़ी लगा दी
लगी डूबने गोकुल नगरी
बहने लगे सबके घर द्वार
त्राहि-त्राहि मची गोकुल में
व्यथित हुए सब नर-नारी
देख इंद्र का कोप कृष्ण ने
फिर से एक लीला रचाई
उठा लिया छोटी उंगली पर
गोवर्धन पर्वत विशाल
आन बसा पर्वत के नीचे
पूरा गोकुल धाम
टूटा अंहकार इंद्र का
कर ली अपनी भूल स्वीकार
फैली हर और खुशी की लहर 
नाच उठी गोकुल नगरी
हे गोवर्धनधारी तेरी महिमा बड़ी निराली
***अनुराधा चौहान***