मन के भाव लिखती हूँ,कविता लिखती हूँ,कहानी लिखती हूँ,यह भाव है मेरे मन के,अपनी मन की जुबानी लिखती हूँ। अनुराधा चौहान
Sunday, October 7, 2018
Saturday, October 6, 2018
विदाई
मैं बाबुल की नन्ही गुड़िया
मैं नन्ही चिरैया मईया की
खेल कूद जिस संग बड़ी हुई
मैं छोटी बहना भईया की
आज विदाई इस आंँगन से
जिसमें खेली बड़ी हुई
मत रोना भईया मेरे
मैं अपने ससुराल चली
छोड़ चली माँ-पापा को
छोड़ चली घर का हर कोना
याद अगर मेरी आए
दुःखी होकर कोई मत रोना
रोकर मुझे विदा करोगे
मैं कैसे सह पाऊँगी
दूर होकर तुम लोगों से
मैं कैसे रह पाऊंगी
बेटी तो होती है पराई
प्रभू ने यह रीत बनाई
इस घर में खेली बड़ी हुई
हो रही आज मेरी विदाई
तुम सब तो साथ रहोगे
मैं तो अकेली हो जाऊंँगी
नए रिश्तों में शायद मैं
खुद को ही भूल जाऊंँगी
हँस कर आशीर्वाद मुझे दो
मेरा जहान आबाद रहे
उस घर में जाकर रम जाऊंँ
इतना मुझे प्यार मिले
***अनुराधा चौहान***
Thursday, October 4, 2018
सफर जिंदगी का
जिंदगी के सफर में
न हो सच्चा हमसफर
बहुत मुश्किल होता है
जीवन का यह सफर
मिलते हैं सफर में फूल
तो मिलते हैं कांटे भी
मीत मिले मन का
तो सुख-दुख आपस में बांटे भी
खड़ी हो जाती है जिंदगी
सफर में दोराहे पर
कहां से शुरू हो फिर
जो पंहूचा दे मंजिल पर
हर डगर आसान मिले
यह तो जरूरी नहीं
टूट कर संभल जाना
जीवन की रीत यही
धूप छांव जीवन के
हर डगर पर मिलती है
जब तक जिंदगी जाकर
मौत से नहीं मिलती है
होता है सफर पूरा
छूट जाते है रिश्ते
सिर्फ कर्म ही इंसान के साथ है जाते
तय करो प्यार से सफर
जब तक है जिंदगी
बाद में तो सिर्फ इंसान के नाम ही रह जाते
***अनुराधा चौहान***
Tuesday, October 2, 2018
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (बापू)
सत्य अहिंसा और धर्म का
सबको पाठ पढ़ाने वाले
राष्ट्रपिता तुम भारत के
भारत का मान बढ़ाने वाले
कष्ट सहे बहुतेरे तुमने
पर शीश न तुमने झुकने दिया
हम सब की आजादी के लिए
अपना सब कुछ बलिदान किया
अभिमान चूर कर अंग्रेजों का
भारत को स्वतंत्र किया
कर्मवीर तुम भारत के
भारत माँ सच्चे लाल
अंग्रेजों से छीन कर देदी
आजादी हमको बिना हथियार
शत् शत् नमन बापू तुमको
याद रखें सब सदियों तुमको
***अनुराधा चौहान***
(चित्र गूगल से साभार)
भारत के लाल
कद छोटा
मन विशाल
भारत का
सपूत महान
दिया नारा
भारत को उसने
जय जवान जय किसान
लाल था प्यारा
भारत माँ का
लाल बहादुर शास्त्री
उनका नाम
कर्म प्रधान था
व्यक्तित्व उनका
तभी पाक भी युद्ध हारा था
सच्चाई से भरा हृदय
मन में देशप्रेम की
ज्वाला थी
द्वितीय प्रधानमंत्री
वो देश के
फिर भी जीवन
सीधा-साधा था
नहीं कामना मन में कोई
सदा देश की
खातिर वो जिए
ऐसे सच्चे लाल थे देश के
सदियों तक उनकी जय गूंजे
शत् शत् नमन
***अनुराधा चौहान***
चित्र गूगल से साभार
Monday, October 1, 2018
उजड़ा गुलशन
कैसा फिजाओं
में जहर घुला
मौसम भी
सहमा सहमा हुआ
कभी गूंजती थी
इस गुलशन में
किलकारियां
मासूम परियों की
अब सब उजड़ा उजड़ा है
गुलशन में
उदासी का पहरा है
धुंआ धुंआ सी
होती जिंदगी
प्रीत कहीं
खोती सी दिखती
संवेदनाएं भी
दम तोड़ रही
अपने पराए की
मारामारी
भाईचारे ने
जान गंवा दी
कब लौटेंगी
फिर से बहारें
कब हंसी की
गूंजे आवाजें
अब कर्म
हमें ही करना है
इस गुलशन को
महकाना है
***अनुराधा चौहान***
में जहर घुला
मौसम भी
सहमा सहमा हुआ
कभी गूंजती थी
इस गुलशन में
किलकारियां
मासूम परियों की
अब सब उजड़ा उजड़ा है
गुलशन में
उदासी का पहरा है
धुंआ धुंआ सी
होती जिंदगी
प्रीत कहीं
खोती सी दिखती
संवेदनाएं भी
दम तोड़ रही
अपने पराए की
मारामारी
भाईचारे ने
जान गंवा दी
कब लौटेंगी
फिर से बहारें
कब हंसी की
गूंजे आवाजें
अब कर्म
हमें ही करना है
इस गुलशन को
महकाना है
***अनुराधा चौहान***
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