Tuesday, September 25, 2018

मन की तृष्णा

मेरे मन की तृष्णा
मुझको डुबो गई
यह यादें तेरी
दिल में मेरे
खंजर चुभो गई
तृष्णाएं मेरे मन की
कैसे बुझाऊं मैं
जितना भुलाऊं
तुझको उतनी
टूट जाऊं मैं
इतना ही था
शायद तेरे मेरे
साथ का बंधन
तूझे भूलने की
खातिर खुद
को भुलाऊं मैं
अनुराधा (अनु )

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